
सप्ताहांत में हुई कई भू-राजनीतिक घटनाओं के बावजूद, सोमवार की शुरुआत में ग्लोबल मार्केट्स में अनिश्चितता बनी हुई है। इसकी वजह अमेरिका की छुट्टी और एशिया में हल्का आर्थिक कैलेंडर हो सकता है। साथ ही, फ़ेडरल रिज़र्व (Fed) के अगले कदम को लेकर ट्रेडर्स की राय भी बंटी हुई है।
इसके बावजूद, अमेरिकी डॉलर में ऊपर जाने की गति नहीं है, जिससे सोने के खरीदार तकनीकी ब्रेकआउट का जश्न मना रहे हैं। इसके साथ ही, European Central Bank (ECB) के अधिकारियों के hawkish बयानों ने EURUSD की रिकवरी को सहारा दिया।
हालांकि, USDJPY में कमजोर यील्ड और Bank of Japan (BoJ) की आसान मौद्रिक नीति से धीरे-धीरे बाहर निकलने को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर दिख रहा है। इसके अलावा, बाज़ार में मिली-जुली धारणा और Asia-Pacific के ट्रेडर्स के बीच बढ़ती सतर्कता के चलते AUDUSD और NZDUSD को अमेरिकी डॉलर की कमजोरी से समर्थन नहीं मिल पा रहा है।
आर्थिक निराशावाद बढ़ने के साथ-साथ मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की कमी की चिंताओं के बीच कच्चा तेल नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी ओर, स्पॉट ETF को मंज़ूरी मिलने पर बाजार के प्रतिभागियों की खुशी और क्रिप्टोकरेंसी में और नकदी आने की उम्मीदों के बीच BTCUSD और ETHUSD में सुधार हुआ।
प्रमुख एसेट्स में हालिया उतार-चढ़ाव इस प्रकार हैं:



US Dollar Index (DXY) के साप्ताहिक चार्ट पर डोजी कैंडल बनी। इससे डॉलर ट्रेडरों के बीच अनिश्चितता दिखी। पिछले हफ़्ते के महंगाई के आंकड़ों ने मिले-जुले संकेत दिए, लेकिन वे मार्च में Fed की ब्याज दरों में कटौती को लेकर बाज़ार की चिंताओं को कम नहीं कर पाए।
पिछले सप्ताह, हेडलाइन Consumer Price Index (CPI) के आंकड़े अनुमान से बेहतर रहे, लेकिन विस्तृत आंकड़े उत्साहजनक नहीं थे। इसी तरह, Producer Price Index (PPI) के आंकड़े 0.1% की उम्मीद के मुकाबले -0.1% MoM पर फिर से आए, जबकि Food & Energy को छोड़कर PPI (जिसे Core PPI भी कहा जाता है) के आंकड़े फिर 0.0% रहे, जबकि विश्लेषकों ने 0.2% का अनुमान लगाया था। हालांकि, PPI सालाना आधार पर संशोधित होकर नीचे आए पिछले आंकड़े 0.8% से बढ़कर 1.0% हो गया। वहीं, Core PPI घटकर 1.8% रहा, जबकि 1.9% की उम्मीद थी और पिछला आंकड़ा 2.0% था।
दूसरी ओर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के मुख्य अर्थशास्त्री Philip Lane ने सप्ताहांत में संकेत दिया कि जून के दौरान जारी होने वाले आंकड़े दरों में कटौती के लिए अहम होंगे। यह बात पहले बताए गए कारकों के साथ मिलकर EURUSD पेयर को 2 महीने पुरानी ऊपर की ओर जाती सपोर्ट लाइन से उबरने में मदद करती है।
फिर भी, भू-राजनीतिक तनाव में हालिया बढ़ोतरी से US Dollar में गिरावट की उम्मीद कर रहे ट्रेडर्स को चुनौती मिल रही है। वहीं, Red Sea में तनाव और Taiwan के चुनाव नतीजे ऐसे अहम कारक हैं जो बाजार के आशावादियों की परीक्षा ले रहे हैं और US Dollar को सहारा दे रहे हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ट्वीट किया कि हूतियों से मालवाहक मार्ग को सुरक्षित कराने के लिए वॉशिंगटन और लंदन के कई हवाई हमलों के बाद, एक जहाज़-रोधी क्रूज़ मिसाइल अमेरिकी नौसेना के जहाज़ पर दागी गई। दूसरी ओर, संप्रभुता समर्थक Democratic Progressive Party (DPP) के William Lai ताइवान के राष्ट्रपति चुने गए हैं। DPP को चीन के साथ कम मैत्रीपूर्ण माना जाता है। पार्टी ने पिछले लगातार आठ वर्षों से ताइवान पर शासन किया है और अब लगातार तीसरा राष्ट्रपति कार्यकाल भी हासिल किया है।
इस बीच, अमेरिकी सरकार के शटडाउन की आशंका कम होने, अमेरिका में छुट्टी और पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना (PBoC) द्वारा नीतिगत दरों में कोई बदलाव न करने से बाज़ार का सतर्क आशावाद बना रहा और अमेरिकी डॉलर पर दबाव पड़ा। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, सीनेट में बहुमत के नेता Chuck Schumer और हाउस स्पीकर Mike Johnson ने शुक्रवार की समय-सीमा से पहले सरकार का शटडाउन टालने के लिए अंतरिम फ़ंडिंग योजना की जानकारी जारी की।
दूसरी ओर, अमेरिका में मंदी न आने की चर्चाओं ने अमेरिकी डॉलर को सहारा दिया। Wall Street Journal (WSJ) के सर्वे में बताया गया कि ज़्यादा अर्थशास्त्री “सॉफ्ट लैंडिंग” की संभावना जता रहे हैं।
Fed के अगले कदम को लेकर बाज़ार में अनिश्चितता है। जनवरी में ब्याज दरों में कटौती की संभावना भले ही न हो, फिर भी ट्रेडर संभवतः अपनी “इंतज़ार करो और नज़र रखो” की रणनीति पर कायम रहेंगे। इससे 30-31 जनवरी की Fed मौद्रिक नीति बैठक से पहले अमेरिकी डॉलर के बुल्स को चुनौती मिल सकती है।
अमेरिकी डॉलर को बाज़ार की स्वीकार्यता नहीं मिली, फिर भी ट्रेडर्स को उम्मीद है कि Fed अधिकारी नरम रुख के खिलाफ़ पीछे हटने का एक आखिरी प्रयास करेंगे। अमेरिका के बाहर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक निराशावाद के साथ यह बात डॉलर को सहारा देती है। हालांकि, आज आंकड़ों और घटनाओं की कमी USD में तेज़ी की उम्मीद रखने वाले ट्रेडर्स की परीक्षा ले सकती है, खासकर कमज़ोर यील्ड के बीच। ध्यान देने वाली बात है कि कनाडा की थोक बिक्री, भारत का व्यापार घाटा और यूरोज़ोन का औद्योगिक उत्पादन बाज़ार में बीच-बीच में हलचल ला सकते हैं।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!