
हॉन्ग कॉन्ग एशिया-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख डिजिटल एसेट हब बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रहा है। वह रिटेल निवेशकों को स्पॉट क्रिप्टो ETF तक पहुंच देने के इरादे से ETF पर चल रही चर्चा में शामिल हो रहा है। फिलहाल, शहर प्रशासन ऐसी पहल के सभी फ़ायदों और नुकसानों का आकलन कर रहा है। कुछ सूत्रों के अनुसार, सरकार स्पॉट डिजिटल एसेट की अनुमति देने के काफ़ी करीब है, लेकिन ऐसा तभी होगा जब सभी नियामकीय चिंताओं का समाधान हो जाए।
एक ओर, हांगकांग नई टेक्नोलॉजी को आज़माने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, यह स्पष्ट समझ है कि नए जोखिमों से निपटना ज़रूरी है। BTC ETF को मंज़ूरी मिलने की खबर के बाद विभिन्न विभागों और न्यायक्षेत्रों में बहस छिड़ गई है। दरअसल, पिछले कई महीनों में वैश्विक क्रिप्टो बाज़ार की बढ़त के पीछे ये अफ़वाहें मुख्य वजह लगती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे डिजिटल एसेट और क्रिप्टोकरेंसी को मुख्यधारा में अधिक स्वीकार्यता मिलेगी। इसके अलावा, बड़ी रकम सीधे डिजिटल एसेट में निवेश की जा सकेगी। नतीजतन, ये निवेशकों के एक बड़े वर्ग के लिए उपलब्ध होंगे।



हॉन्ग कॉन्ग और अमेरिका, दोनों में फ्यूचर्स-आधारित क्रिप्टो ETF में निवेश की सुविधा पहले से उपलब्ध है। हालांकि, इनका अपनाया जाना निवेश की संभावनाओं और फंड इंडस्ट्री के कुल आकार की तुलना में काफी निराशाजनक है।
फिर भी, एशिया-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख क्रिप्टो हब बनने के लिए हांगकांग ने कई बड़े कदम उठाए। वह पहले से ही क्रिप्टो के लिए अधिक अनुकूल वित्तीय माहौल बनाने की कोशिशें तेज़ कर रहा है। जून में सरकार ने डिजिटल एसेट के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए एक वर्चुअल फ्रेमवर्क पेश किया।
इसके अलावा, यह क्षेत्र उन कंपनियों को आमंत्रित करता है जो डिजिटल एसेट तकनीक की संभावनाओं को गहराई से समझने और आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। साथ ही, SFC ने आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए तरीके अपनाए हैं। वर्चुअल एसेट एक्सचेंज लाइसेंस और टोकनाइज़ेशन की पूरी प्रक्रिया के लिए एक विशेष नियामकीय व्यवस्था लागू है, जिसमें वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ रिटेल ट्रेडर भी शामिल हैं।
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